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सहीह बुख़ारी

नंबर 4710

नंबर 4710किताब 65, नंबर 232
حَدَّثَنَا أَحْمَدُ بْنُ صَالِحٍ، حَدَّثَنَا ابْنُ وَهْبٍ، قَالَ أَخْبَرَنِي يُونُسُ، عَنِ ابْنِ شِهَابٍ، قَالَ أَبُو سَلَمَةَ سَمِعْتُ جَابِرَ بْنَ عَبْدِ اللَّهِ ـ رضى الله عنهما ـ قَالَ سَمِعْتُ النَّبِيَّ صلى الله عليه وسلم يَقُولُ ‏"‏ لَمَّا كَذَّبَنِي قُرَيْشٌ قُمْتُ فِي الْحِجْرِ، فَجَلَّى اللَّهُ لِي بَيْتَ الْمَقْدِسِ فَطَفِقْتُ أُخْبِرُهُمْ عَنْ آيَاتِهِ وَأَنَا أَنْظُرُ إِلَيْهِ ‏"‏‏.‏ زَادَ يَعْقُوبُ بْنُ إِبْرَاهِيمَ حَدَّثَنَا ابْنُ أَخِي ابْنِ شِهَابٍ عَنْ عَمِّهِ ‏"‏ لَمَّا كَذَّبَنِي قُرَيْشٌ حِينَ أُسْرِيَ بِي إِلَى بَيْتِ الْمَقْدِسِ ‏"‏‏.‏ نَحْوَهُ‏.‏ ‏{‏قَاصِفًا‏}‏ رِيحٌ تَقْصِفُ كُلَّ شَىْءٍ‏.‏
Narrated Jabir bin `Abdullah:The Prophet (ﷺ) said, "When the Quraish disbelieved me (concerning my night journey), I stood up in Al- Hijr (the unroofed portion of the Ka`ba) and Allah displayed Bait-ul-Maqdis before me, and I started to inform them (Quraish) about its signs while looking at it

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 65 · Prophetic Commentary on the Qur'an (Tafseer of the Prophet (pbuh))

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।