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सहीह बुख़ारी

नंबर 4644

नंबर 4644किताब 65, नंबर 166
وَقَالَ عَبْدُ اللَّهِ بْنُ بَرَّادٍ حَدَّثَنَا أَبُو أُسَامَةَ، حَدَّثَنَا هِشَامٌ، عَنْ أَبِيهِ، عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ الزُّبَيْرِ، قَالَ أَمَرَ اللَّهُ نَبِيَّهُ صلى الله عليه وسلم أَنْ يَأْخُذَ الْعَفْوَ مِنْ أَخْلاَقِ النَّاسِ‏.‏ أَوْ كَمَا قَالَ‏.‏
Abdullah bin Az-Zubair said:Allah ordered His Prophet to forgive the people their misbehavior (towards him)

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 65 · Prophetic Commentary on the Qur'an (Tafseer of the Prophet (pbuh))

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।