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सहीह बुख़ारी

नंबर 4544

नंबर 4544किताब 65, नंबर 67
حَدَّثَنَا قَبِيصَةُ بْنُ عُقْبَةَ، حَدَّثَنَا سُفْيَانُ، عَنْ عَاصِمٍ، عَنِ الشَّعْبِيِّ، عَنِ ابْنِ عَبَّاسٍ ـ رضى الله عنهما ـ قَالَ آخِرُ آيَةٍ نَزَلَتْ عَلَى النَّبِيِّ صلى الله عليه وسلم آيَةُ الرِّبَا‏.‏
Narrated Ibn `Abbas:The last Verse (in the Qur'an) revealed to the Prophet (ﷺ) was the Verse dealing with usury (i.e. Riba)

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 65 · Prophetic Commentary on the Qur'an (Tafseer of the Prophet (pbuh))

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।