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सहीह बुख़ारी

नंबर 4461

नंबर 4461किताब 64, नंबर 477
حَدَّثَنَا قُتَيْبَةُ، حَدَّثَنَا أَبُو الأَحْوَصِ، عَنْ أَبِي إِسْحَاقَ، عَنْ عَمْرِو بْنِ الْحَارِثِ، قَالَ مَا تَرَكَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم دِينَارًا وَلاَ دِرْهَمًا وَلاَ عَبْدًا وَلاَ أَمَةً، إِلاَّ بَغْلَتَهُ الْبَيْضَاءَ الَّتِي كَانَ يَرْكَبُهَا، وَسِلاَحَهُ، وَأَرْضًا جَعَلَهَا لاِبْنِ السَّبِيلِ صَدَقَةً‏.‏
Narrated 'Amir bin Al-Harith:Allah's Messenger (ﷺ) did not leave a Dinar or a Dirham or a male or a female slave. He left only his white mule on which he used to ride, and his weapons, and a piece of land which he gave in charity for the needy travelers

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 64 · Military Expeditions led by the Prophet (pbuh) (Al-Maghaazi)

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।