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सहीह बुख़ारी

नंबर 4460

नंबर 4460किताब 64, नंबर 476
حَدَّثَنَا أَبُو نُعَيْمٍ، حَدَّثَنَا مَالِكُ بْنُ مِغْوَلٍ، عَنْ طَلْحَةَ، قَالَ سَأَلْتُ عَبْدَ اللَّهِ بْنَ أَبِي أَوْفَى ـ رضى الله عنهما ـ أَوْصَى النَّبِيُّ صلى الله عليه وسلم فَقَالَ لاَ‏.‏ فَقُلْتُ كَيْفَ كُتِبَ عَلَى النَّاسِ الْوَصِيَّةُ أَوْ أُمِرُوا بِهَا قَالَ أَوْصَى بِكِتَابِ اللَّهِ‏.‏
Narrated Talha:I asked `Abdullah bin Abu `Aufa "Did the Prophet (ﷺ) make a will? ' He replied, "No." I further asked, "How come is it that the making of a will was enjoined on the people or that they were ordered to make it? " He said, "The Prophet (ﷺ) made a will concerning Allah's Book

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 64 · Military Expeditions led by the Prophet (pbuh) (Al-Maghaazi)

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।