حَدَّثَنِي يَحْيَى بْنُ قَزَعَةَ، حَدَّثَنَا مَالِكٌ، عَنِ ابْنِ شِهَابٍ، عَنْ عَبْدِ اللَّهِ، وَالْحَسَنِ، ابْنَىْ مُحَمَّدِ بْنِ عَلِيٍّ عَنْ أَبِيهِمَا، عَنْ عَلِيِّ بْنِ أَبِي طَالِبٍ ـ رضى الله عنه ـ أَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم نَهَى عَنْ مُتْعَةِ النِّسَاءِ يَوْمَ خَيْبَرَ، وَعَنْ أَكْلِ الْحُمُرِ الإِنْسِيَّةِ.
Narrated `Ali bin Abi Talib:On the day of Khaibar, Allah's Messenger (ﷺ) forbade the Mut'a (i.e. temporary marriage) and the eating of donkey-meat
स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।
हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।
अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।