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सहीह बुख़ारी

नंबर 4174

नंबर 4174किताब 64, नंबर 216
وَعَنْ مَجْزَأَةَ، عَنْ رَجُلٍ، مِنْهُمْ مِنْ أَصْحَابِ الشَّجَرَةِ اسْمُهُ أُهْبَانُ بْنُ أَوْسٍ وَكَانَ اشْتَكَى رُكْبَتَهُ، وَكَانَ إِذَا سَجَدَ جَعَلَ تَحْتَ رُكْبَتِهِ وِسَادَةً‏.‏
The same narration was told by Majzaa from a man called Uhban bin Aus who was one of those who had witnessed (the Pledge of allegiance beneath) the Tree., and who had some trouble in his knee so that while doing prostrations, he used to put a pillow underneath his knee

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 64 · Military Expeditions led by the Prophet (pbuh) (Al-Maghaazi)

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।