सीधे कंटेंट पर जाएँ
सहीह बुख़ारी

नंबर 4156

नंबर 4156किताब 64, नंबर 200
حَدَّثَنَا إِبْرَاهِيمُ بْنُ مُوسَى، أَخْبَرَنَا عِيسَى، عَنْ إِسْمَاعِيلَ، عَنْ قَيْسٍ، أَنَّهُ سَمِعَ مِرْدَاسًا الأَسْلَمِيَّ، يَقُولُ ـ وَكَانَ مِنْ أَصْحَابِ الشَّجَرَةِ ـ يُقْبَضُ الصَّالِحُونَ الأَوَّلُ فَالأَوَّلُ، وَتَبْقَى حُفَالَةٌ كَحُفَالَةِ التَّمْرِ وَالشَّعِيرِ، لاَ يَعْبَأُ اللَّهُ بِهِمْ شَيْئًا‏.‏
Narrated Mirdas Al-Aslami:Who was among those (who had given the Pledge of allegiance) under the Tree: Pious people will die in succession, and there will remain the dregs of society who will be like the useless residues of dates and barley and Allah will pay no attention to them

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 64 · Military Expeditions led by the Prophet (pbuh) (Al-Maghaazi)

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।