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सहीह बुख़ारी

नंबर 4155

नंबर 4155किताब 64, नंबर 199
وَقَالَ عُبَيْدُ اللَّهِ بْنُ مُعَاذٍ حَدَّثَنَا أَبِي، حَدَّثَنَا شُعْبَةُ، عَنْ عَمْرِو بْنِ مُرَّةَ، حَدَّثَنِي عَبْدُ اللَّهِ بْنُ أَبِي أَوْفَى ـ رضى الله عنهما ـ كَانَ أَصْحَابُ الشَّجَرَةِ أَلْفًا وَثَلاَثَمِائَةٍ، وَكَانَتْ أَسْلَمُ ثُمْنَ الْمُهَاجِرِينَ‏.‏ تَابَعَهُ مُحَمَّدُ بْنُ بَشَّارٍ حَدَّثَنَا أَبُو دَاوُدَ حَدَّثَنَا شُعْبَةُ‏.‏
Abdullah bin Abi `Aufa said, "The people (who gave the Pledge of allegiance) under the Tree numbered 1300 and the number of Bani Aslam was 1/8 of the Emigrants

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 64 · Military Expeditions led by the Prophet (pbuh) (Al-Maghaazi)

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।