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सहीह बुख़ारी

नंबर 4059

नंबर 4059किताब 64, नंबर 105
حَدَّثَنَا يَسَرَةُ بْنُ صَفْوَانَ، حَدَّثَنَا إِبْرَاهِيمُ، عَنْ أَبِيهِ، عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ شَدَّادٍ، عَنْ عَلِيٍّ ـ رضى الله عنه ـ قَالَ مَا سَمِعْتُ النَّبِيَّ صلى الله عليه وسلم جَمَعَ أَبَوَيْهِ لأَحَدٍ إِلاَّ لِسَعْدِ بْنِ مَالِكٍ، فَإِنِّي سَمِعْتُهُ يَقُولُ يَوْمَ أُحُدٍ ‏ "‏ يَا سَعْدُ ارْمِ، فِدَاكَ أَبِي وَأُمِّي ‏"‏‏.‏
Narrated `Ali:I have never heard the Prophet (ﷺ) mentioning his father and mother for anybody other than Sa`d bin Malik. I heard him saying on the day of Uhud, "O Sa`d throw (arrows)! Let my father and mother be sacrificed for you

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 64 · Military Expeditions led by the Prophet (pbuh) (Al-Maghaazi)

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।