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सहीह बुख़ारी

नंबर 4018

नंबर 4018किताब 64, नंबर 67
حَدَّثَنِي إِبْرَاهِيمُ بْنُ الْمُنْذِرِ، حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ فُلَيْحٍ، عَنْ مُوسَى بْنِ عُقْبَةَ، قَالَ ابْنُ شِهَابٍ حَدَّثَنَا أَنَسُ بْنُ مَالِكٍ، أَنَّ رِجَالاً، مِنَ الأَنْصَارِ اسْتَأْذَنُوا رَسُولَ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم فَقَالُوا ائْذَنْ لَنَا فَلْنَتْرُكْ لاِبْنِ أُخْتِنَا عَبَّاسٍ فِدَاءَهُ‏.‏ قَالَ ‏ "‏ وَاللَّهِ لاَ تَذَرُونَ مِنْهُ دِرْهَمًا ‏"‏‏.‏
Narrated Anas bin Malik:Some men of the Ansar requested Allah's Messenger (ﷺ) to allow them to see him, they said, "Allow us to forgive the ransom of our sister's son, `Abbas." The Prophet (ﷺ) said, "By Allah, you will not leave a single Dirham of it

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 64 · Military Expeditions led by the Prophet (pbuh) (Al-Maghaazi)

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।