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सहीह बुख़ारी

नंबर 3945

नंबर 3945किताब 63, नंबर 169
حَدَّثَنِي زِيَادُ بْنُ أَيُّوبَ، حَدَّثَنَا هُشَيْمٌ، أَخْبَرَنَا أَبُو بِشْرٍ، عَنْ سَعِيدِ بْنِ جُبَيْرٍ، عَنِ ابْنِ عَبَّاسٍ ـ رضى الله عنهما ـ قَالَ هُمْ أَهْلُ الْكِتَابِ، جَزَّءُوهُ أَجْزَاءً، فَآمَنُوا بِبَعْضِهِ وَكَفَرُوا بِبَعْضِهِ‏.‏ ‏{‏يَعْنِي قَوْلَ اللَّهِ تَعَالَى ‏{‏الَّذِينَ جَعَلُوا الْقُرْآنَ عِضِينَ ‏}‏
Narrated Ibn `Abbas:They, the people of the Scriptures, divided this Scripture into parts, believing in some portions of it and disbelieving the others. (See 15:)

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 63 · Merits of the Helpers in Madinah (Ansaar)

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।