सीधे कंटेंट पर जाएँ
सहीह बुख़ारी

नंबर 3809

नंबर 3809किताब 63, नंबर 34
حَدَّثَنِي مُحَمَّدُ بْنُ بَشَّارٍ، حَدَّثَنَا غُنْدَرٌ، قَالَ سَمِعْتُ شُعْبَةَ، سَمِعْتُ قَتَادَةَ، عَنْ أَنَسِ بْنِ مَالِكٍ ـ رضى الله عنه ـ قَالَ النَّبِيُّ صلى الله عليه وسلم لأُبَىٍّ ‏"‏ إِنَّ اللَّهَ أَمَرَنِي أَنْ أَقْرَأَ عَلَيْكَ ‏{‏لَمْ يَكُنِ الَّذِينَ كَفَرُوا‏}‏ ‏"‏‏.‏ قَالَ وَسَمَّانِي قَالَ ‏"‏ نَعَمْ ‏"‏ فَبَكَى‏.‏
Narrated Anas bin Malik:The Prophet (ﷺ) said to Ubai, "Allah has ordered me to recite to you: 'Those who disbelieve (Surat-al- Bayina 98).' " Ubai said, "Has He mentioned my name?" The Prophet (ﷺ) said, "Yes." On hearing this, Ubai started weeping

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 63 · Merits of the Helpers in Madinah (Ansaar)

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।