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सहीह बुख़ारी

नंबर 3808

नंबर 3808किताब 63, नंबर 33
حَدَّثَنَا أَبُو الْوَلِيدِ، حَدَّثَنَا شُعْبَةُ، عَنْ عَمْرِو بْنِ مُرَّةَ، عَنْ إِبْرَاهِيمَ، عَنْ مَسْرُوقٍ، قَالَ ذُكِرَ عَبْدُ اللَّهِ بْنُ مَسْعُودٍ عِنْدَ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ عَمْرٍو فَقَالَ ذَاكَ رَجُلٌ لاَ أَزَالُ أُحِبُّهُ، سَمِعْتُ النَّبِيَّ صلى الله عليه وسلم يَقُولُ ‏ "‏ خُذُوا الْقُرْآنَ مِنْ أَرْبَعَةٍ مِنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ مَسْعُودٍ ـ فَبَدَأَ بِهِ ـ وَسَالِمٍ مَوْلَى أَبِي حُذَيْفَةَ، وَمُعَاذِ بْنِ جَبَلٍ، وَأُبَىِّ بْنِ كَعْبٍ ‏"‏‏.‏
Narrated Masruq:`Abdullah bin Masud was mentioned before `Abdullah bin `Amr who said, "That is a man I still love, as I heard the Prophet (ﷺ) saying 'Learn the recitation of Qur'an from four from `Abdullah bin Mas`ud -- he started with him--Salim, the freed slave of Abu Hudaifa, Mu`adh bin Jabal and Ubai bin Ka`b

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 63 · Merits of the Helpers in Madinah (Ansaar)

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।