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सहीह बुख़ारी

नंबर 3796

नंबर 3796किताब 63, नंबर 21
حَدَّثَنَا آدَمُ، حَدَّثَنَا شُعْبَةُ، عَنْ حُمَيْدٍ الطَّوِيلِ، سَمِعْتُ أَنَسَ بْنَ مَالِكٍ ـ رضى الله عنه ـ قَالَ كَانَتِ الأَنْصَارُ يَوْمَ الْخَنْدَقِ تَقُولُ نَحْنُ الَّذِينَ بَايَعُوا مُحَمَّدَا عَلَى الْجِهَادِ مَا حَيِينَا أَبَدَا فَأَجَابَهُمُ اللَّهُمَّ لاَ عَيْشَ إِلاَّ عَيْشُ الآخِرَهْ فَأَكْرِمِ الأَنْصَارَ وَالْمُهَاجِرَهْ
Narrated Anas bin Malik:On the day of the battle of the Trench (i.e. Ghazwat-ul-Khandaq) the Ansar used to say, "We are those who have given the pledge of allegiance to Muhammad for Jihad (i.e. holy fighting) as long as we live." The Prophet (ﷺ) , replied to them, "O Allah! There is no life except the life of the Hereafter; so please honor the Ansar and the Emigrants

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 63 · Merits of the Helpers in Madinah (Ansaar)

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।