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सहीह बुख़ारी

नंबर 3795

नंबर 3795किताब 63, नंबर 20
حَدَّثَنَا آدَمُ، حَدَّثَنَا شُعْبَةُ، حَدَّثَنَا أَبُو إِيَاسٍ، عَنْ أَنَسِ بْنِ مَالِكٍ ـ رضى الله عنه ـ قَالَ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم ‏ "‏ لاَ عَيْشَ إِلاَّ عَيْشُ الآخِرَةِ، فَأَصْلِحِ الأَنْصَارَ وَالْمُهَاجِرَةَ ‏"‏‏.‏ وَعَنْ قَتَادَةَ عَنْ أَنَسٍ عَنِ النَّبِيِّ صلى الله عليه وسلم مِثْلَهُ، وَقَالَ فَاغْفِرْ لِلأَنْصَارِ‏.‏
Narrated Anas bin Malik:Allah's Messenger (ﷺ) said, "There is no life except the life of the Hereafter; so, O Allah! Improve the state of the Ansar and the Muhajirun." And Anas added that the Prophet (ﷺ) also said, "O Allah! Forgive the Ansar

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 63 · Merits of the Helpers in Madinah (Ansaar)

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।