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सहीह बुख़ारी

नंबर 3710

नंबर 3710किताब 62, नंबर 60
حَدَّثَنَا الْحَسَنُ بْنُ مُحَمَّدٍ، حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ عَبْدِ اللَّهِ الأَنْصَارِيُّ، حَدَّثَنِي أَبِي عَبْدُ اللَّهِ بْنُ الْمُثَنَّى، عَنْ ثُمَامَةَ بْنِ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ أَنَسٍ، عَنْ أَنَسٍ ـ رضى الله عنه أَنَّ عُمَرَ بْنَ الْخَطَّابِ، كَانَ إِذَا قَحَطُوا اسْتَسْقَى بِالْعَبَّاسِ بْنِ عَبْدِ الْمُطَّلِبِ، فَقَالَ اللَّهُمَّ إِنَّا كُنَّا نَتَوَسَّلُ إِلَيْكَ بِنَبِيِّنَا صلى الله عليه وسلم فَتَسْقِينَا، وَإِنَّا نَتَوَسَّلُ إِلَيْكَ بِعَمِّ نَبِيِّنَا فَاسْقِنَا‏.‏ قَالَ فَيُسْقَوْنَ‏.‏
Narrated Anas:Whenever there was drought, `Umar bin Al-Khattab used to ask Allah for rain through Al-`Abbas bin `Abdul Muttalib, saying, "O Allah! We used to request our Prophet to ask You for rain, and You would give us. Now we request the uncle of our Prophet to ask You for rain, so give us rain." And they would be given rain

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 62 · Companions of the Prophet

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।