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सहीह बुख़ारी

नंबर 3688

नंबर 3688किताब 62, नंबर 38
حَدَّثَنَا سُلَيْمَانُ بْنُ حَرْبٍ، حَدَّثَنَا حَمَّادُ بْنُ زَيْدٍ، عَنْ ثَابِتٍ، عَنْ أَنَسٍ ـ رضى الله عنه ـ أَنَّ رَجُلاً، سَأَلَ النَّبِيَّ صلى الله عليه وسلم عَنِ السَّاعَةِ، فَقَالَ مَتَى السَّاعَةُ قَالَ ‏"‏ وَمَاذَا أَعْدَدْتَ لَهَا ‏"‏‏.‏ قَالَ لاَ شَىْءَ إِلاَّ أَنِّي أُحِبُّ اللَّهَ وَرَسُولَهُ صلى الله عليه وسلم‏.‏ فَقَالَ ‏"‏ أَنْتَ مَعَ مَنْ أَحْبَبْتَ ‏"‏‏.‏ قَالَ أَنَسٌ فَمَا فَرِحْنَا بِشَىْءٍ فَرَحَنَا بِقَوْلِ النَّبِيِّ صلى الله عليه وسلم ‏"‏ أَنْتَ مَعَ مَنْ أَحْبَبْتَ ‏"‏‏.‏ قَالَ أَنَسٌ فَأَنَا أُحِبُّ النَّبِيَّ صلى الله عليه وسلم وَأَبَا بَكْرٍ وَعُمَرَ، وَأَرْجُو أَنْ أَكُونَ مَعَهُمْ بِحُبِّي إِيَّاهُمْ، وَإِنْ لَمْ أَعْمَلْ بِمِثْلِ أَعْمَالِهِمْ‏.‏
अनस रज़ियल्लाहु अनहु का वर्णन है, वह कहते हैं : एक व्यक्ति ने अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम से क़यामत के बारे में पूछा। उसने कहा : क़यामत कब आएगी? आपने कहा : "तुमने उसके लिए क्या तैयारी की है?" उसने कहा : तैयारी तो वैसे कुछ नहीं की है, लेकिन इतना ज़रूर है कि मैं अल्लाह और उसके रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम से मोहब्बत रखता हूँ। इसपर आपने कहा : "तुम्हें उसके साथ रहने का सौभाग्य प्राप्त होगा, जिससे तुम्हें मोहब्बत है।" अनस रज़ियल्लाहु अनहु कहते हैं : हम किसी चीज़ से उतना खुश नहीं हुए, जितना अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम के इस कथन से हुए कि तुम्हें उसके साथ रहने का सौभाग्य प्राप्त होगा, जिससे तुम्हें मोहब्बत है। अनस रज़ियल्लाहु अनहु कहते हैं : मैं अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम तथा अबू बक्र एवं उमर रज़ियल्लाहु अनहुमा से मोहब्बत रखता हूँ और आशा करता हूँ कि उनसे इस मोहब्बत के कारण मुझे उनके साथ रहने का सौभाग्य प्राप्त होगा, यद्यपि मैं उनके जैसा अमल न भी कर सकूँ।

तर्जुमा: HadeethEnc.comइसकी तशरीह

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

जहाँ तर्जुमा शुदा नबवी हदीसों के इनसाइक्लोपीडिया (HadeethEnc.com) में किसी रिवायत का हूबहू टेक्स्ट मौजूद है, वहाँ उसका तर्जुमा उसी रिवायत के नीचे स्रोत के नाम के साथ दिखाया गया है। दोनों को प्रोग्राम के ज़रिए, सिर्फ़ अरबी टेक्स्ट की बुनियाद पर जोड़ा गया है: इनसाइक्लोपीडिया की हदीस का पूरा टेक्स्ट, उसमें दर्ज सहाबी के नाम समेत, रिवायत का आख़िरी हिस्सा है, हर्फ़-ब-हर्फ़। इस जोड़ को किसी ने नहीं जाँचा है, और सबील के जायज़ाकारों ने तर्जुमे की जाँच नहीं की है। असल टेक्स्ट अरबी है।

किताब 62 · Companions of the Prophet

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।