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सहीह बुख़ारी

नंबर 3687

नंबर 3687किताब 62, नंबर 37
حَدَّثَنَا يَحْيَى بْنُ سُلَيْمَانَ، قَالَ حَدَّثَنِي ابْنُ وَهْبٍ، قَالَ حَدَّثَنِي عُمَرُ، هُوَ ابْنُ مُحَمَّدٍ أَنَّ زَيْدَ بْنَ أَسْلَمَ، حَدَّثَهُ عَنْ أَبِيهِ، قَالَ سَأَلَنِي ابْنُ عُمَرَ عَنْ بَعْضِ، شَأْنِهِ ـ يَعْنِي عُمَرَ ـ فَأَخْبَرْتُهُ‏.‏ فَقَالَ، مَا رَأَيْتُ أَحَدًا قَطُّ بَعْدَ رَسُولِ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم مِنْ حِينَ قُبِضَ كَانَ أَجَدَّ وَأَجْوَدَ حَتَّى انْتَهَى مِنْ عُمَرَ بْنِ الْخَطَّابِ‏.‏
Narrated Aslam:Ibn `Umar asked me about some matters concerning `Umar. He said, "Since Allah's Messenger (ﷺ) died. I have never seen anybody more serious, hard working and generous than `Umar bin Al-Khattab (till the end of his life)

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 62 · Companions of the Prophet

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।