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सहीह बुख़ारी

नंबर 3659

नंबर 3659किताब 62, नंबर 11
حَدَّثَنَا الْحُمَيْدِيُّ، وَمُحَمَّدُ بْنُ عَبْدِ اللَّهِ، قَالاَ حَدَّثَنَا إِبْرَاهِيمُ بْنُ سَعْدٍ، عَنْ أَبِيهِ، عَنْ مُحَمَّدِ بْنِ جُبَيْرِ بْنِ مُطْعِمٍ، عَنْ أَبِيهِ، قَالَ أَتَتِ امْرَأَةٌ النَّبِيَّ صلى الله عليه وسلم فَأَمَرَهَا أَنْ تَرْجِعَ إِلَيْهِ‏.‏ قَالَتْ أَرَأَيْتَ إِنْ جِئْتُ وَلَمْ أَجِدْكَ كَأَنَّهَا تَقُولُ الْمَوْتَ‏.‏ قَالَ عَلَيْهِ السَّلاَمُ ‏ "‏ إِنْ لَمْ تَجِدِينِي فَأْتِي أَبَا بَكْرٍ ‏"‏‏.‏
Narrated Jubair bin Mut`im:A woman came to the Prophet (ﷺ) who ordered her to return to him again. She said, "What if I came and did not find you?" as if she wanted to say, "If I found you dead?" The Prophet (ﷺ) said, "If you should not find me, go to Abu Bakr

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 62 · Companions of the Prophet

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।