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सहीह बुख़ारी

नंबर 2902

नंबर 2902किताब 56, नंबर 116
حَدَّثَنَا أَحْمَدُ بْنُ مُحَمَّدٍ، أَخْبَرَنَا عَبْدُ اللَّهِ، أَخْبَرَنَا الأَوْزَاعِيُّ، عَنْ إِسْحَاقَ بْنِ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ أَبِي طَلْحَةَ، عَنْ أَنَسِ بْنِ مَالِكٍ ـ رضى الله عنه ـ قَالَ كَانَ أَبُو طَلْحَةَ يَتَتَرَّسُ مَعَ النَّبِيِّ صلى الله عليه وسلم بِتُرْسٍ وَاحِدٍ، وَكَانَ أَبُو طَلْحَةَ حَسَنَ الرَّمْىِ، فَكَانَ إِذَا رَمَى تَشَرَّفَ النَّبِيُّ صلى الله عليه وسلم فَيَنْظُرُ إِلَى مَوْضِعِ نَبْلِهِ‏.‏
Narrated Anas bin Malik:Abu Talha and the Prophet (ﷺ) used to shield themselves with one shield. Abu Talha was a good archer, and when he threw (his arrows) the Prophet (ﷺ) would look at the target of his arrows

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 56 · Fighting for the Cause of Allah (Jihaad)

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।