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सहीह बुख़ारी

नंबर 2901

नंबर 2901किताब 56, नंबर 115
حَدَّثَنَا إِبْرَاهِيمُ بْنُ مُوسَى، أَخْبَرَنَا هِشَامٌ، عَنْ مَعْمَرٍ، عَنِ الزُّهْرِيِّ، عَنِ ابْنِ الْمُسَيَّبِ، عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ ـ رضى الله عنه ـ قَالَ بَيْنَا الْحَبَشَةُ يَلْعَبُونَ عِنْدَ النَّبِيِّ صلى الله عليه وسلم بِحِرَابِهِمْ دَخَلَ عُمَرُ، فَأَهْوَى إِلَى الْحَصَى فَحَصَبَهُمْ بِهَا‏.‏ فَقَالَ ‏ "‏ دَعْهُمْ يَا عُمَرُ ‏"‏‏.‏ وَزَادَ عَلِيٌّ حَدَّثَنَا عَبْدُ الرَّزَّاقِ أَخْبَرَنَا مَعْمَرٌ فِي الْمَسْجِدِ‏.‏
Narrated Abu Huraira:While some Ethiopians were playing in the presence of the Prophet, `Umar came in, picked up a stone and hit them with it. On that the Prophet (ﷺ) said, "O `Umar! Allow them (to play)." Ma`mar (the subnarrator) added that they were playing in the Mosque

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 56 · Fighting for the Cause of Allah (Jihaad)

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।