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सहीह बुख़ारी

नंबर 2847

नंबर 2847किताब 56, नंबर 63
حَدَّثَنَا صَدَقَةُ، أَخْبَرَنَا ابْنُ عُيَيْنَةَ، حَدَّثَنَا ابْنُ الْمُنْكَدِرِ، سَمِعَ جَابِرَ بْنَ عَبْدِ اللَّهِ ـ رضى الله عنهما ـ قَالَ نَدَبَ النَّبِيُّ صلى الله عليه وسلم النَّاسَ ـ قَالَ صَدَقَةُ أَظُنُّهُ ـ يَوْمَ الْخَنْدَقِ فَانْتَدَبَ الزُّبَيْرُ، ثُمَّ نَدَبَ فَانْتَدَبَ الزُّبَيْرُ، ثُمَّ نَدَبَ النَّاسَ فَانْتَدَبَ الزُّبَيْرُ فَقَالَ النَّبِيُّ صلى الله عليه وسلم ‏ "‏ إِنَّ لِكُلِّ نَبِيٍّ حَوَارِيًّا، وَإِنَّ حَوَارِيَّ الزُّبَيْرُ بْنُ الْعَوَّامِ ‏"‏‏.‏
Narrated Jabir bin `Abdullah:When the Prophet (ﷺ) called the people (Sadaqa, a sub-narrator, said, 'Most likely that happened on the day of Al-Khandaq) Az-Zubair responded to the call (i.e. to act as a scout). The Prophet) called the people again and Az-Zubair responded to the call. The Prophet (ﷺ) then said, "Every prophet had a disciple and my disciple is Zubair bin Al-`Awwam

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 56 · Fighting for the Cause of Allah (Jihaad)

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।