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सहीह बुख़ारी

नंबर 2846

नंबर 2846किताब 56, नंबर 62
حَدَّثَنَا أَبُو نُعَيْمٍ، حَدَّثَنَا سُفْيَانُ، عَنْ مُحَمَّدِ بْنِ الْمُنْكَدِرِ، عَنْ جَابِرٍ ـ رضى الله عنه ـ قَالَ قَالَ النَّبِيُّ صلى الله عليه وسلم ‏"‏ مَنْ يَأْتِينِي بِخَبَرِ الْقَوْمِ يَوْمَ الأَحْزَابِ ‏"‏‏.‏ قَالَ الزُّبَيْرُ أَنَا‏.‏ ثُمَّ قَالَ ‏"‏ مَنْ يَأْتِينِي بِخَبَرِ الْقَوْمِ ‏"‏‏.‏ قَالَ الزُّبَيْرُ أَنَا‏.‏ فَقَالَ النَّبِيُّ صلى الله عليه وسلم ‏"‏ إِنَّ لِكُلِّ نَبِيٍّ حَوَارِيًّا، وَحَوَارِيَّ الزُّبَيْرُ ‏"‏‏.‏
जाबिर -रज़ियल्लाहु अन्हुमा- से रिवायत है, वह कहते हैं कि नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने अहज़ाब युद्ध के दिन फरमायाः "मेरे पास दुश्मन की ख़बर कौन लाएगा?" ज़ुबैर -रज़ियल्लाहु अन्हु- ने कहाः मैं लाऊँगा। आपने फिर फ़रमायाः "मेरे पास दुश्मन की ख़बर कौन लाएगा?" ज़ुबैर -रज़ियल्लाहु अन्हु- ने फिर कहा कि मैं लाऊँगा। तब अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने फरमायाः "हर नबी का एक हवारी (निष्ठावान सहायक) होता है और मेरा हवारी ज़ुबैर है।"

तर्जुमा: HadeethEnc.comइसकी तशरीह

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

जहाँ तर्जुमा शुदा नबवी हदीसों के इनसाइक्लोपीडिया (HadeethEnc.com) में किसी रिवायत का हूबहू टेक्स्ट मौजूद है, वहाँ उसका तर्जुमा उसी रिवायत के नीचे स्रोत के नाम के साथ दिखाया गया है। दोनों को प्रोग्राम के ज़रिए, सिर्फ़ अरबी टेक्स्ट की बुनियाद पर जोड़ा गया है: इनसाइक्लोपीडिया की हदीस का पूरा टेक्स्ट, उसमें दर्ज सहाबी के नाम समेत, रिवायत का आख़िरी हिस्सा है, हर्फ़-ब-हर्फ़। इस जोड़ को किसी ने नहीं जाँचा है, और सबील के जायज़ाकारों ने तर्जुमे की जाँच नहीं की है। असल टेक्स्ट अरबी है।

किताब 56 · Fighting for the Cause of Allah (Jihaad)

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।