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सहीह बुख़ारी

नंबर 2810

नंबर 2810किताब 56, नंबर 26
حَدَّثَنَا سُلَيْمَانُ بْنُ حَرْبٍ، حَدَّثَنَا شُعْبَةُ، عَنْ عَمْرٍو، عَنْ أَبِي وَائِلٍ، عَنْ أَبِي مُوسَى ـ رضى الله عنه ـ قَالَ جَاءَ رَجُلٌ إِلَى النَّبِيِّ صلى الله عليه وسلم فَقَالَ الرَّجُلُ يُقَاتِلُ لِلْمَغْنَمِ، وَالرَّجُلُ يُقَاتِلُ لِلذِّكْرِ، وَالرَّجُلُ يُقَاتِلُ لِيُرَى مَكَانُهُ، فَمَنْ فِي سَبِيلِ اللَّهِ قَالَ ‏ "‏ مَنْ قَاتَلَ لِتَكُونَ كَلِمَةُ اللَّهِ هِيَ الْعُلْيَا فَهُوَ فِي سَبِيلِ اللَّهِ ‏"‏‏.‏
Narrated Abu Musa:A man came to the Prophet (ﷺ) and asked, "A man fights for war booty; another fights for fame and a third fights for showing off; which of them fights in Allah's Cause?" The Prophet (ﷺ) said, "He who fights that Allah's Word (i.e. Islam) should be superior, fights in Allah's Cause

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 56 · Fighting for the Cause of Allah (Jihaad)

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।