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सहीह बुख़ारी

नंबर 2628

नंबर 2628किताब 51, नंबर 60
حَدَّثَنَا أَبُو نُعَيْمٍ، حَدَّثَنَا عَبْدُ الْوَاحِدِ بْنُ أَيْمَنَ، قَالَ حَدَّثَنِي أَبِي قَالَ، دَخَلْتُ عَلَى عَائِشَةَ ـ رضى الله عنها ـ وَعَلَيْهَا دِرْعُ قِطْرٍ ثَمَنُ خَمْسَةِ دَرَاهِمَ، فَقَالَتِ ارْفَعْ بَصَرَكَ إِلَى جَارِيَتِي، انْظُرْ إِلَيْهَا فَإِنَّهَا تُزْهَى أَنْ تَلْبَسَهُ فِي الْبَيْتِ، وَقَدْ كَانَ لِي مِنْهُنَّ دِرْعٌ عَلَى عَهْدِ رَسُولِ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم، فَمَا كَانَتِ امْرَأَةٌ تُقَيَّنُ بِالْمَدِينَةِ إِلاَّ أَرْسَلَتْ إِلَىَّ تَسْتَعِيرُهُ‏.‏
Narrated Aiman:I went to `Aisha and she was wearing a coarse dress costing five Dirhams. `Aisha said, "Look up and see my slave-girl who refuses to wear it in the house though during the lifetime of Allah's Messenger (ﷺ) I had a similar dress which no woman desiring to appear elegant (before her husband) failed to borrow from me

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 51 · Gifts

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।