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सहीह बुख़ारी

नंबर 2591

नंबर 2591किताब 51, नंबर 25
حَدَّثَنَا عُبَيْدُ اللَّهِ بْنُ سَعِيدٍ، حَدَّثَنَا عَبْدُ اللَّهِ بْنُ نُمَيْرٍ، حَدَّثَنَا هِشَامُ بْنُ عُرْوَةَ، عَنْ فَاطِمَةَ، عَنْ أَسْمَاءَ، أَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم قَالَ ‏ "‏ أَنْفِقِي وَلاَ تُحْصِي فَيُحْصِيَ اللَّهُ عَلَيْكِ، وَلاَ تُوعِي فَيُوعِيَ اللَّهُ عَلَيْكِ ‏"‏‏.‏
Narrated Asma:Allah's Messenger (ﷺ) said, "Give (in charity) and do not give reluctantly lest Allah should give you in a limited amount; and do not withhold your money lest Allah should withhold it from you

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 51 · Gifts

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।