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सहीह बुख़ारी

नंबर 2590

नंबर 2590किताब 51, नंबर 24
حَدَّثَنَا أَبُو عَاصِمٍ، عَنِ ابْنِ جُرَيْجٍ، عَنِ ابْنِ أَبِي مُلَيْكَةَ، عَنْ عَبَّادِ بْنِ عَبْدِ اللَّهِ، عَنْ أَسْمَاءَ ـ رضى الله عنها ـ قَالَتْ قُلْتُ يَا رَسُولَ اللَّهِ مَا لِي مَالٌ إِلاَّ مَا أَدْخَلَ عَلَىَّ الزُّبَيْرُ فَأَتَصَدَّقُ‏.‏ قَالَ ‏ "‏ تَصَدَّقِي، وَلاَ تُوعِي فَيُوعَى عَلَيْكِ ‏"‏‏.‏
Narrated Asma:Once I said, "O Allah's Messenger (ﷺ)! I have no property except what has been given to me by Az-Zubair (i.e. her husband). May I give in charity?" The Prophet (ﷺ) said, "Give in charity and do not withhold it; otherwise Allah will withhold it back from you

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 51 · Gifts

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।