सीधे कंटेंट पर जाएँ
सहीह बुख़ारी

नंबर 2478

नंबर 2478किताब 46, नंबर 39
حَدَّثَنَا عَلِيُّ بْنُ عَبْدِ اللَّهِ، حَدَّثَنَا سُفْيَانُ، حَدَّثَنَا ابْنُ أَبِي نَجِيحٍ، عَنْ مُجَاهِدٍ، عَنْ أَبِي مَعْمَرٍ، عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ مَسْعُودٍ ـ رضى الله عنه ـ قَالَ دَخَلَ النَّبِيُّ صلى الله عليه وسلم مَكَّةَ، وَحَوْلَ الْكَعْبَةِ ثَلاَثُمِائَةٍ وَسِتُّونَ نُصُبًا فَجَعَلَ يَطْعَنُهَا بِعُودٍ فِي يَدِهِ وَجَعَلَ يَقُولُ ‏{‏جَاءَ الْحَقُّ وَزَهَقَ الْبَاطِلُ‏}‏ الآيَةَ‏.‏
Narrated `Abdullah bin Mas`ud:The Prophet (ﷺ) entered Mecca and (at that time) there were three hundred-and-sixty idols around the Ka`ba. He started stabbing the idols with a stick he had in his hand and reciting: "Truth (Islam) has come and Falsehood (disbelief) has vanished

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 46 · Oppressions

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।