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सहीह बुख़ारी

नंबर 2404

नंबर 2404किताब 43, नंबर 20
وَقَالَ اللَّيْثُ حَدَّثَنِي جَعْفَرُ بْنُ رَبِيعَةَ، عَنْ عَبْدِ الرَّحْمَنِ بْنِ هُرْمُزَ، عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ ـ رضى الله عنه ـ عَنْ رَسُولِ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم أَنَّهُ ذَكَرَ رَجُلاً مِنْ بَنِي إِسْرَائِيلَ، سَأَلَ بَعْضَ بَنِي إِسْرَائِيلَ أَنْ يُسْلِفَهُ، فَدَفَعَهَا إِلَيْهِ إِلَى أَجَلٍ مُسَمًّى‏.‏ فَذَكَرَ الْحَدِيثَ‏.‏
Narrated Abu Hurairah (ra):Allah's Messenger (ﷺ) mentioned an Israeli man who asked another Israeli to lend him money, and the latter gave it to him for a fixed period. (Abu Hurairah mentioned the rest of narration) [See chapter: Kafala in loans and debts. Hadith]

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 43 · Loans, Payment of Loans, Freezing of Property, Bankruptcy

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।