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सहीह बुख़ारी

नंबर 1913

नंबर 1913किताब 30, नंबर 23
حَدَّثَنَا آدَمُ، حَدَّثَنَا شُعْبَةُ، حَدَّثَنَا الأَسْوَدُ بْنُ قَيْسٍ، حَدَّثَنَا سَعِيدُ بْنُ عَمْرٍو، أَنَّهُ سَمِعَ ابْنَ عُمَرَ ـ رضى الله عنهما ـ عَنِ النَّبِيِّ صلى الله عليه وسلم أَنَّهُ قَالَ ‏ "‏ إِنَّا أُمَّةٌ أُمِّيَّةٌ، لاَ نَكْتُبُ وَلاَ نَحْسُبُ الشَّهْرُ هَكَذَا وَهَكَذَا ‏"‏‏.‏ يَعْنِي مَرَّةً تِسْعَةً وَعِشْرِينَ، وَمَرَّةً ثَلاَثِينَ‏.‏
Narrated Ibn `Umar:The Prophet (ﷺ) said, "We are an illiterate nation; we neither write, nor know accounts. The month is like this and this, i.e. sometimes of 29 days and sometimes of thirty days

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 30 · Fasting

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।