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सहीह बुख़ारी

नंबर 1912

नंबर 1912किताब 30, नंबर 22
حَدَّثَنَا مُسَدَّدٌ، حَدَّثَنَا مُعْتَمِرٌ، قَالَ سَمِعْتُ إِسْحَاقَ، عَنْ عَبْدِ الرَّحْمَنِ بْنِ أَبِي بَكْرَةَ، عَنْ أَبِيهِ، عَنِ النَّبِيِّ صلى الله عليه وسلم‏.‏ وَحَدَّثَنِي مُسَدَّدٌ، حَدَّثَنَا مُعْتَمِرٌ، عَنْ خَالِدٍ الْحَذَّاءِ، قَالَ أَخْبَرَنِي عَبْدُ الرَّحْمَنِ بْنُ أَبِي بَكْرَةَ، عَنْ أَبِيهِ ـ رضى الله عنه ـ عَنِ النَّبِيِّ صلى الله عليه وسلم قَالَ ‏ "‏ شَهْرَانِ لاَ يَنْقُصَانِ شَهْرَا عِيدٍ رَمَضَانُ وَذُو الْحَجَّةِ ‏"‏‏.‏
Narrated Abu Bakra:The Prophet (ﷺ) said, "The two months of `Id i.e. Ramadan and Dhul-Hijja, do not decrease (in superiority)

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 30 · Fasting

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।