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सहीह बुख़ारी

नंबर 1888

नंबर 1888किताब 29, नंबर 22
حَدَّثَنَا مُسَدَّدٌ، عَنْ يَحْيَى، عَنْ عُبَيْدِ اللَّهِ بْنِ عُمَرَ، قَالَ حَدَّثَنِي خُبَيْبُ بْنُ عَبْدِ الرَّحْمَنِ، عَنْ حَفْصِ بْنِ عَاصِمٍ، عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ ـ رضى الله عنه ـ عَنِ النَّبِيِّ صلى الله عليه وسلم قَالَ ‏ "‏ مَا بَيْنَ بَيْتِي وَمِنْبَرِي رَوْضَةٌ مِنْ رِيَاضِ الْجَنَّةِ، وَمِنْبَرِي عَلَى حَوْضِي ‏"‏‏.‏
Narrated Abu Huraira:The Prophet (ﷺ) said, "There is a garden from the gardens of Paradise between my house and my pulpit, and my pulpit is on my Lake Fount (Al-Kauthar)

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 29 · Virtues of Madinah

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।