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सहीह बुख़ारी

नंबर 1887

नंबर 1887किताब 29, नंबर 21
حَدَّثَنَا ابْنُ سَلاَمٍ، أَخْبَرَنَا الْفَزَارِيُّ، عَنْ حُمَيْدٍ الطَّوِيلِ، عَنْ أَنَسٍ ـ رضى الله عنه ـ قَالَ أَرَادَ بَنُو سَلِمَةَ أَنْ يَتَحَوَّلُوا، إِلَى قُرْبِ الْمَسْجِدِ، فَكَرِهَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم أَنْ تُعْرَى الْمَدِينَةُ، وَقَالَ ‏ "‏ يَا بَنِي سَلِمَةَ‏.‏ أَلاَ تَحْتَسِبُونَ آثَارَكُمْ ‏"‏‏.‏ فَأَقَامُوا‏.‏
Narrated Anas:(The people of) Bani Salama intended to shift near the mosque (of the Prophet) but Allah's Messenger (ﷺ) disliked to see Medina vacated and said, "O the people of Bani Salama! Don't you think that you will be rewarded for your footsteps which you take towards the mosque?" So, they stayed at their old places

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 29 · Virtues of Madinah

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।