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सहीह बुख़ारी

नंबर 1876

नंबर 1876किताब 29, नंबर 10
حَدَّثَنَا إِبْرَاهِيمُ بْنُ الْمُنْذِرِ، حَدَّثَنَا أَنَسُ بْنُ عِيَاضٍ، قَالَ حَدَّثَنِي عُبَيْدُ اللَّهِ، عَنْ خُبَيْبِ بْنِ عَبْدِ الرَّحْمَنِ، عَنْ حَفْصِ بْنِ عَاصِمٍ، عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ ـ رضى الله عنه ـ أَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم قَالَ ‏ "‏ إِنَّ الإِيمَانَ لَيَأْرِزُ إِلَى الْمَدِينَةِ كَمَا تَأْرِزُ الْحَيَّةُ إِلَى جُحْرِهَا ‏"‏‏.‏
Narrated Abu Huraira:Allah's Messenger (ﷺ) said, "Verily, Belief returns and goes back to Medina as a snake returns and goes back to its hole (when in danger)

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 29 · Virtues of Madinah

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।