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सहीह बुख़ारी

नंबर 1748

नंबर 1748किताब 25, नंबर 226
حَدَّثَنَا حَفْصُ بْنُ عُمَرَ، حَدَّثَنَا شُعْبَةُ، عَنِ الْحَكَمِ، عَنْ إِبْرَاهِيمَ، عَنْ عَبْدِ الرَّحْمَنِ بْنِ يَزِيدَ، عَنْ عَ��ْدِ اللَّهِ ـ رضى الله عنه ـ أَنَّهُ انْتَهَى إِلَى الْجَمْرَةِ الْكُبْرَى جَعَلَ الْبَيْتَ عَنْ يَسَارِهِ، وَمِنًى عَنْ يَمِينِهِ، وَرَمَى بِسَبْعٍ، وَقَالَ هَكَذَا رَمَى الَّذِي أُنْزِلَتْ عَلَيْهِ سُورَةُ الْبَقَرَةِ صلى الله عليه وسلم‏.‏
Narrated `Abdur-Rahman bin Yazid:When `Abdullah, reached the big Jamra (i.e. Jamrat-ul-Aqaba) he kept the Ka`ba on the left side and Mina on his right side and threw seven pebbles (at the Jamra) and said, "The one on whom Surat-al- Baqara was revealed (i.e. the Prophet) had done the Rami similarly

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 25 · Hajj (Pilgrimage)

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।