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सहीह बुख़ारी

नंबर 1633

नंबर 1633किताब 25, नंबर 116
حَدَّثَنَا عَبْدُ اللَّهِ بْنُ مَسْلَمَةَ، حَدَّثَنَا مَالِكٌ، عَنْ مُحَمَّدِ بْنِ عَبْدِ الرَّحْمَنِ بْنِ نَوْفَلٍ، عَنْ عُرْوَةَ، عَنْ زَيْنَبَ ابْنَةِ أُمِّ سَلَمَةَ، عَنْ أُمِّ سَلَمَةَ ـ رضى الله عنها ـ قَالَتْ شَكَوْتُ إِلَى رَسُولِ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم أَنِّي أَشْتَكِي‏.‏ فَقَالَ ‏ "‏ طُوفِي مِنْ وَرَاءِ النَّاسِ وَأَنْتِ رَاكِبَةٌ ‏"‏‏.‏ فَطُفْتُ وَرَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم يُصَلِّي إِلَى جَنْبِ الْبَيْتِ، وَهْوَ يَقْرَأُ بِالطُّورِ وَكِتَابٍ مَسْطُورٍ‏.‏
Narrated Um Salama:I informed Allah's Messenger (ﷺ) that I was sick. He said, "Perform Tawaf (of the Ka`ba) while riding behind the people." So, I performed the Tawaf while Allah's Messenger (ﷺ) was offering the prayer beside the Ka`ba and was reciting Surat-at-Tur

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 25 · Hajj (Pilgrimage)

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।