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सहीह बुख़ारी

नंबर 1515

नंबर 1515किताब 25, नंबर 3
حَدَّثَنَا إِبْرَاهِيمُ، أَخْبَرَنَا الْوَلِيدُ، حَدَّثَنَا الأَوْزَاعِيُّ، سَمِعَ عَطَاءً، يُحَدِّثُ عَنْ جَابِرِ بْنِ عَبْدِ اللَّهِ ـ رضى الله عنهما ـ أَنَّ إِهْلاَلَ رَسُولِ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم مِنْ ذِي الْحُلَيْفَةِ حِينَ اسْتَوَتْ بِهِ رَاحِلَتُهُ‏.‏ رَوَاهُ أَنَسٌ وَابْنُ عَبَّاسٍ رضى الله عنهم‏.‏
Narrated Jabir bin `Abdullah:that Allah's Messenger (ﷺ) started saying, "Labbaik" from Dhul-Hulaifa when his Mount stood upright carrying him

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 25 · Hajj (Pilgrimage)

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।