सीधे कंटेंट पर जाएँ
सहीह बुख़ारी

नंबर 1514

नंबर 1514किताब 25, नंबर 2
حَدَّثَنَا أَحْمَدُ بْنُ عِيسَى، حَدَّثَنَا ابْنُ وَهْبٍ، عَنْ يُونُسَ، عَنِ ابْنِ شِهَابٍ، أَنَّ سَالِمَ بْنَ عَبْدِ اللَّهِ، أَخْبَرَهُ أَنَّ ابْنَ عُمَرَ ـ رضى الله عنهما ـ قَالَ رَأَيْتُ رَسُولَ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم يَرْكَبُ رَاحِلَتَهُ بِذِي الْحُلَيْفَةِ ثُمَّ يُهِلُّ حَتَّى تَسْتَوِيَ بِهِ قَائِمَةً‏.‏
Narrated Ibn `Umar:I saw that Allah's Messenger (ﷺ) used to ride on his Mount at Dhul Hulaifa and used to start saying, "Labbaik" when the Mount stood upright

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 25 · Hajj (Pilgrimage)

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।