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सहीह बुख़ारी

नंबर 1451

नंबर 1451किताब 24, नंबर 54
حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ عَبْدِ اللَّهِ، قَالَ حَدَّثَنِي أَبِي قَالَ، حَدَّثَنِي ثُمَامَةُ، أَنَّ أَنَسًا، حَدَّثَهُ أَنَّ أَبَا بَكْرٍ ـ رضى الله عنه ـ كَتَبَ لَهُ الَّتِي فَرَضَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم ‏ "‏ وَمَا كَانَ مِنْ خَلِيطَيْنِ فَإِنَّهُمَا يَتَرَاجَعَانِ بَيْنَهُمَا بِالسَّوِيَّةِ ‏"‏‏.‏
Narrated Anas:Abu Bakr wrote to me what Allah's Messenger (ﷺ) has made compulsory (regarding Zakat) and this was mentioned in it: If a property is equally owned by two partners, they should pay the combined Zakat and it will be considered that both of them have paid their Zakat equally

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 24 · Obligatory Charity Tax (Zakat)

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।