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सहीह बुख़ारी

नंबर 1450

नंबर 1450किताब 24, नंबर 53
حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ عَبْدِ اللَّهِ الأَنْصَارِيُّ، قَالَ حَدَّثَنِي أَبِي قَالَ، حَدَّثَنِي ثُمَامَةُ، أَنَّ أَنَسًا ـ رضى الله عنه ـ حَدَّثَهُ أَنَّ أَبَا بَكْرٍ ـ رضى الله عنه ـ كَتَبَ لَهُ الَّتِي فَرَضَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم ‏ "‏ وَلاَ يُجْمَعُ بَيْنَ مُتَفَرِّقٍ، وَلاَ يُفَرَّقُ بَيْنَ مُجْتَمِعٍ، خَشْيَةَ الصَّدَقَةِ ‏"‏‏.‏
Narrated Anas:Abu Bakr wrote to me what was made compulsory by Allah's Messenger (ﷺ) and that was (regarding the payments of Zakat): Neither the property of different people may be taken together nor the joint property may be split for fear of (paying more, or receiving less) Zakat

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 24 · Obligatory Charity Tax (Zakat)

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।