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सहीह बुख़ारी

नंबर 1441

नंबर 1441किताब 24, नंबर 44
حَدَّثَنَا يَحْيَى بْنُ يَحْيَى، أَخْبَرَنَا جَرِيرٌ، عَنْ مَنْصُورٍ، عَنْ شَقِيقٍ، عَنْ مَسْرُوقٍ، عَنْ عَائِشَةَ ـ رضى الله عنها ـ عَنِ النَّبِيِّ صلى الله عليه وسلم قَالَ ‏ "‏ إِذَا أَنْفَقَتِ الْمَرْأَةُ مِنْ طَعَامِ بَيْتِهَا غَيْرَ مُفْسِدَةٍ فَلَهَا أَجْرُهَا، وَلِلزَّوْجِ بِمَا اكْتَسَبَ، وَلِلْخَازِنِ مِثْلُ ذَلِكَ ‏"‏‏.‏
Narrated `Aisha:The Prophet (ﷺ) said, "When a woman gives in charity from her house meals in Allah's Cause without spoiling her husband's property, she will get a reward for it, and her husband will also get the reward for his earnings and the storekeeper will get a reward likewise

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 24 · Obligatory Charity Tax (Zakat)

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।