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सहीह बुख़ारी

नंबर 1440

नंबर 1440किताब 24, नंबर 43
حَدَّثَنَا عُمَرُ بْنُ حَفْصٍ، حَدَّثَنَا أَبِي، حَدَّثَنَا الأَعْمَشُ، عَنْ شَقِيقٍ، عَنْ مَسْرُوقٍ، عَنْ عَائِشَةَ ـ رضى الله عنها ـ قَالَتْ قَالَ النَّبِيُّ صلى الله عليه وسلم ‏ "‏ إِذَا أَطْعَمَتِ الْمَرْأَةُ مِنْ بَيْتِ زَوْجِهَا غَيْرَ مُفْسِدَةٍ، لَهَا أَجْرُهَا، وَلَهُ مِثْلُهُ، وَلِلْخَازِنِ مِثْلُ ذَلِكَ، لَهُ بِمَا اكْتَسَبَ، وَلَهَا بِمَا أَنْفَقَتْ ‏"‏‏.‏
Narrate Aisha:The Prophet (ﷺ) said, "If a woman gives in charity from her husband's house .." The Prophet (ﷺ) also said, "If a lady gives meals (in charity) from her husband's house without spoiling her husband's property, she will get a reward and her husband will also get a reward likewise. The husband will get a reward because of his earnings and the woman because of her spending

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 24 · Obligatory Charity Tax (Zakat)

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।