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सहीह बुख़ारी

नंबर 1438

नंबर 1438किताब 24, नंबर 41
حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ الْعَلاَءِ، حَدَّثَنَا أَبُو أُسَامَةَ، عَنْ بُرَيْدِ بْنِ عَبْدِ اللَّهِ، عَنْ أَبِي بُرْدَةَ، عَنْ أَبِي مُوسَى، عَنِ النَّبِيِّ صلى الله عليه وسلم قَالَ ‏ "‏ الْخَازِنُ الْمُسْلِمُ الأَمِينُ الَّذِي يُنْفِذُ ـ وَرُبَّمَا قَالَ يُعْطِي ـ مَا أُمِرَ بِهِ كَامِلاً مُوَفَّرًا طَيِّبٌ بِهِ نَفْسُهُ، فَيَدْفَعُهُ إِلَى الَّذِي أُمِرَ لَهُ بِهِ، أَحَدُ الْمُتَصَدِّقَيْنِ ‏"‏‏.‏
Narrated Abu Musa:The Prophet (ﷺ) said, "An honest Muslim storekeeper who carries out the orders of his master and pays fully what he has been ordered to give with a good heart and pays to that person to whom he was ordered to pay, is regarded as one of the two charitable persons

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 24 · Obligatory Charity Tax (Zakat)

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।