حَدَّثَنَا قُتَيْبَةُ بْنُ سَعِيدٍ، حَدَّثَنَا جَرِيرٌ، عَنِ الأَعْمَشِ، عَنْ أَبِي وَائِلٍ، عَنْ مَسْرُوقٍ، عَنْ عَائِشَةَ ـ رضى الله عنها ـ قَالَتْ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم " إِذَا تَصَدَّقَتِ الْمَرْأَةُ مِنْ طَعَامِ زَوْجِهَا غَيْرَ مُفْسِدَةٍ كَانَ لَهَا أَجْرُهَا، وَلِزَوْجِهَا بِمَا كَسَبَ، وَلِلْخَازِنِ مِثْلُ ذَلِكَ ".
Narrated `Aisha:Allah's Messenger (ﷺ) said, "When a woman gives in charity from her husband's meals without wasting the property of her husband, she will get a reward for it, and her husband too will get a reward for what he earned and the storekeeper will have the reward likewise
स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।
हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।
अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।