حَدَّثَنَا إِسْمَاعِيلُ بْنُ خَلِيلٍ، حَدَّثَنَا عَلِيُّ بْنُ مُسْهِرٍ، حَدَّثَنَا أَبُو إِسْحَاقَ ـ وَهْوَ الشَّيْبَانِيُّ ـ عَنْ أَبِي بُرْدَةَ، عَنْ أَبِيهِ، قَالَ لَمَّا أُصِيبَ عُمَرُ ـ رضى الله عنه ـ جَعَلَ صُهَيْبٌ يَقُولُ وَاأَخَاهُ. فَقَالَ عُمَرُ أَمَا عَلِمْتَ أَنَّ النَّبِيَّ صلى الله عليه وسلم قَالَ " إِنَّ الْمَيِّتَ لَيُعَذَّبُ بِبُكَاءِ الْحَىِّ ".
Narrated Abu Burda:That his father said, "When `Umar was stabbed, Suhaib started crying: O my brother! `Umar said, 'Don't you know that the Prophet (ﷺ) said: The deceased is tortured for the weeping of the living'?
स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।
हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।
अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।