حَدَّثَنَا عَبْدُ اللَّهِ بْنُ مَسْلَمَةَ، حَدَّثَنَا مَالِكٌ، عَنْ أَبِي النَّضْرِ، عَنْ أَبِي سَلَمَةَ، عَنْ عَائِشَةَ ـ رضى الله عنها ـ قَالَتْ كُنْتُ أَمُدُّ رِجْلِي فِي قِبْلَةِ النَّبِيِّ صلى الله عليه وسلم وَهُوَ يُصَلِّي، فَإِذَا سَجَدَ غَمَزَنِي فَرَفَعْتُهَا، فَإِذَا قَامَ مَدَدْتُهَا.
Narrated Aisha:I used to stretch my legs towards the Qibla of the Prophet (ﷺ) while he was praying; whenever he prostrated he touched me, and I would withdraw my legs, and whenever he stood up, I would restretch my legs
स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।
हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।
अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।