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सहीह बुख़ारी

नंबर 1208

नंबर 1208किताब 21, नंबर 12
حَدَّثَنَا مُسَدَّدٌ، حَدَّثَنَا بِشْرٌ، حَدَّثَنَا غَالِبٌ، عَنْ بَكْرِ بْنِ عَبْدِ اللَّهِ، عَنْ أَنَسِ بْنِ مَالِكٍ ـ رضى الله عنه ـ قَالَ كُنَّا نُصَلِّي مَعَ النَّبِيِّ صلى الله عليه وسلم فِي شِدَّةِ الْحَرِّ، فَإِذَا لَمْ يَسْتَطِعْ أَحَدُنَا أَنْ يُمَكِّنَ وَجْهَهُ مِنَ الأَرْضِ بَسَطَ ثَوْبَهُ فَسَجَدَ عَلَيْهِ‏.‏
Narrated Anas bin Malik:We used to pray with the Prophet (ﷺ) in scorching heat, and if someone of us could not put his face on the earth (because of the heat) then he would spread his clothes and prostrate over them

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 21 · Actions while Praying

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।