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सहीह बुख़ारी

नंबर 1108

नंबर 1108किताब 18, नंबर 28
وَعَنْ حُسَيْنٍ، عَنْ يَحْيَى بْنِ أَبِي كَثِيرٍ، عَنْ حَفْصِ بْنِ عُبَيْدِ اللَّهِ بْنِ أَنَسٍ، عَنْ أَنَسِ بْنِ مَالِكٍ ـ رضى الله عنه ـ قَالَ كَانَ النَّبِيُّ صلى الله عليه وسلم يَجْمَعُ بَيْنَ صَلاَةِ الْمَغْرِبِ وَالْعِشَاءِ فِي السَّفَرِ‏.‏ وَتَابَعَهُ عَلِيُّ بْنُ الْمُبَارَكِ وَحَرْبٌ عَنْ يَحْيَى عَنْ حَفْصٍ عَنْ أَنَسٍ جَمَعَ النَّبِيُّ صلى الله عليه وسلم‏.‏
Narrated Anas:Allah's Messenger (ﷺ) used to offer these two prayers together on journeys i.e. the Maghrib and the `Isha

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 18 · Shortening the Prayers (At-Taqseer)

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।