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सहीह बुख़ारी

नंबर 1107

नंबर 1107किताब 18, नंबर 27
وَقَالَ إِبْرَاهِيمُ بْنُ طَهْمَانَ عَنِ الْحُسَيْنِ الْمُعَلِّمِ، عَنْ يَحْيَى بْنِ أَبِي كَثِيرٍ، عَنْ عِكْرِمَةَ، عَنِ ابْنِ عَبَّاسٍ ـ رضى الله عنهما ـ قَالَ كَانَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم يَجْمَعُ بَيْنَ صَلاَةِ الظُّهْرِ وَالْعَصْرِ إِذَا كَانَ عَلَى ظَهْرِ سَيْرٍ، وَيَجْمَعُ بَيْنَ الْمَغْرِبِ وَالْعِشَاءِ‏.‏
Narrated Ibn `Abbas: Allah's Messenger (ﷺ) used to offer the Zuhr and `Asr prayers together on journeys, and also used to offer the Maghrib and `Isha' prayers together. Narrated Anas bin Malik: The Prophet (ﷺ) used to offer the Maghrib and the `Isha' prayers together on journeys

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 18 · Shortening the Prayers (At-Taqseer)

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।